Homeछत्तीसगढआखिर क्या है लखनी देवी मंदिर का इतिहास? यहाँ कैसे पूरी होती है भक्तों की सभी मनोकामनाएं. आईये जानते हैं इस नवरात्रि विशेष खबर मे माता लक्ष्मी के एकमात्र सिद्ध शक्तिपीठ के बारे में
आखिर क्या है लखनी देवी मंदिर का इतिहास? यहाँ कैसे पूरी होती है भक्तों की सभी मनोकामनाएं. आईये जानते हैं इस नवरात्रि विशेष खबर मे माता लक्ष्मी के एकमात्र सिद्ध शक्तिपीठ के बारे में
बिलासपुर
:- धार्मिक नगरी रतनपुर से ब्लॉक मुख्यालय कोटा जाने वाले मार्ग पर मां महालक्ष्मी
(लखनी देवी) का मंदिर स्थित है! इस मंदिर के संबंध में आम मान्यता है कि अविभाजित
मध्यप्रदेश यानि वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य और मध्यप्रदेश को मिलाकर लक्ष्मी
देवी का एक मात्र सिद्ध शक्तिपीठ यहाँ स्थापित हैं! प्रदेश में उपलब्ध शिलालेख और
पौराणिक ग्रन्थों में उल्लेखित है कि लखनी देवी मंदिर का निर्माण हैहयवंशी राजा
रत्नदेव तृतीय ( 1179 ई.)
के मंत्री गंगाधर शास्त्री ने पुष्पक विमान आकृति पहाड़ी पर कराया था! यहाँ माता
लखनी देवी की दिव्य एवं मनमोहक प्रतिमा विराजमान है! वर्ष की दोनों नवरात्रि पर
यहाँ मेले का आयोजन किया जाता है! जहाँ आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूरदराज से
भक्त जन माता के दर्शन के लिए आते हैं! पौराणिक कथाओं के अनुसार लखनी देवी की पूजा
इकबीरा देवी या ग्राम देवी के रूप में भी की जाती है! महालक्ष्मी देवी का एक मात्र
सिद्ध शक्तिपीठ होने की वजह से इस मंदिर की भक्तों में बहुत मान्यता है ! लखनी
देवी मंदिर में दोनों नवरात्रि में ज्योति कलश और जवारा लगाया जाता है! ऐसी
मान्यता है कि इस मंदिर में ज्योति कलश प्रज्ज्वलित करने और जवारा लगाने से भक्तों
की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं! मंदिर में उपर माता के दर्शन के लिए 259 सीढियों चढकर जाना पड़ता है! मंदिर के उपर
के हिस्से में हनुमान जी की 80 फीट ऊंची प्रतिमा बनाई गई है जो लोगों की आस्था का केंद्र है! पहाड़ के
उपर से नीचे का नजारा अत्यंत नयनाभिराम नजर आता है! लखनी देवी माता की कृपा सभी
भक्तों पर सदैव बनी रहती है!
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