
कोरबा :- गत
भारी बारिश से ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल चैतुरगढ़ मंदिर तक पहुँच हेतु निर्मित
रैम्प मार्ग के क्षतिग्रस्त होने के कारण श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में
रखते हुए आगामी चैत्र बासंती नवरात्रि पर्व को स्थगित किया गया था, जिसमे
मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित नही किये जाने और केवल माता के दरबार में नवरात्रि
के 9 दिन तक पूजा अनुष्ठान का निर्णय था। लेकिन आस्था व जन भावनाओ को
ध्यान में रख सांसद प्रतिनिधि के पहल पर अब यहां बासंती चैत्र नवरात्रि मनेगी और
भक्तगण दीप प्रज्वलित कराने के साथ माता के दर्शन भी कर सकेंगे।
जिले के धार्मिक
पर्यटन स्थल चैतुरगढ़ स्थित आदिशक्ति मां महिषासुर मर्दिनी देवी के दरबार तक जाने
निर्मित रेम्प सहित अन्य विकास कार्यों को गत भारी बारिश से काफी नुकसान पहुँचा था,
जिसमे
रैम्प की स्थिति खतरनाक होने के साथ कई जगह भूस्खलन और रैम्प, सड़क,
पहाड़
पर जगह- जगह गहरी दरारें आने से प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान
में रखते हुए माता के दर्शन हेतु पैदल आवाजाही पर पूर्व में ही रोक लगा दी गई थी।
वहीं आगामी 2 अप्रैल से आरंभ हो रहे चैत्र (बासंती)
नवरात्रि पर्व को धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ नहीं मनाने का निर्णय लिया गया था।
जिसमे मंदिर परिसर में हजारों आस्था के दीप (मनोकामना ज्योति कलश) प्रज्वलित नहीं
करने और केवल मंदिर के गर्भ गृह में 1 अखंड ज्योति के साथ 2 और
ज्योति कलश तथा कलश भवन में 5 ज्योति कलश प्रज्वलित करने सहित माता
के दरबार में 9 दिनों तक नियमित रूप से पूजा, हवन
अनुष्ठान विधि विधान से करने निर्देश था। प्रशासन के जिस निर्णय से माता के भक्तों
में मायूसी छा गई थी। किंतु आस्था और जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए सांसद
प्रतिनिधि व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संयुक्त महासचिव एवं गौ सेवा आयोग के सदस्य
प्रशांत मिश्रा द्वारा किये गए पहल पर जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए रोक हटा दी गई
है। अब माता का दरबार इस नवरात्रि पर सूना नही रहेगा व 9
दिनों तक यहां
आस्था की धूम रहेगी और श्रद्धालुगण मां महिषासुर मर्दिनी के दर्शन करने के साथ
मनोकामना ज्योति कलश भी प्रज्वलित करा सकेंगे।
क्षतिग्रस्त
रैम्प के मरम्मत को लेकर जायजा लेने सांसद प्रतिनिधि पहुँचे चैतुरगढ़
सांसद प्रतिनिधि प्रशांत मिश्रा द्वारा रैम्प मरम्मत कार्य को लेकर कलेक्टर से चर्चा करने उपरांत बीते 26 मार्च को तहसीलदार के साथ चैतुरगढ़ पहुँच क्षतिग्रस्त रैम्प- सड़क का जायजा लिया और शीघ्र ही मरम्मत कार्य प्रारंभ कराने की बात कही। श्री मिश्रा ने माता के दरबार मे पहुँचकर पूजा- अर्चना भी की। इस दौरान जिला कांग्रेस कमेटी सचिव एवं पाली नगर पंचायत के एल्डरमेन सुरेश गुप्ता, पाली नगर पंचायत अध्यक्ष उमेश चंद्रा, ग्राम पंचायत जेमरा के सरपंच भंवर सिंह व स्थानीय ग्रामीणजन उनके साथ रहे।
वन विभाग के
परभरोसे रवैये से छह माह में नहीं हो सका रैम्प मरम्मत कार्य
रैम्प और सड़क के क्षतिग्रस्त होने के 6 माह बाद भी इसका मरम्मत वन विभाग के परभरोसे रवैये से नहीं हो सका है। स्थानीय वन अधिकारी की ओर से इसके लिए एक कार्ययोजना का प्रस्ताव प्रशासन को जरूर भेजा गया था। लेकिन निष्क्रिय जनप्रतिनिधि के भरोसे रहने से कार्य अब तक स्वीकृत नहीं हुआ। साथ ही वन अधिकारी पुरातत्व विभाग की एनओसी नहीं मिलने की बात भी कर रहे है। किंतु मरम्मत कार्य के लिए पुरातत्व विभाग हस्तक्षेप नहीं करेगा। यदि जिला प्रशासन और वन अधिकारी गंभीरता और सक्रियता दिखाते या जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले जनप्रतिनिधि इसके लिए ठोस पहल और प्रयास करते तो शायद यह कार्य अब तक पूर्ण हो गया होता। लेकिन दुर्भाग्य कि यह काम अबतक नही हो पाया। जिसके कारण रैम्प के हालात व निर्मित विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी माता के भक्त, श्रद्धालु और पर्यटक जान जोखिम में डालकर माता के दर्शन करने पहुंच रहे हैं और अपने मनोकामना की पूर्ति कर रहे हैं।
सांसद प्रतिनिधि प्रशांत मिश्रा द्वारा रैम्प मरम्मत कार्य को लेकर कलेक्टर से चर्चा करने उपरांत बीते 26 मार्च को तहसीलदार के साथ चैतुरगढ़ पहुँच क्षतिग्रस्त रैम्प- सड़क का जायजा लिया और शीघ्र ही मरम्मत कार्य प्रारंभ कराने की बात कही। श्री मिश्रा ने माता के दरबार मे पहुँचकर पूजा- अर्चना भी की। इस दौरान जिला कांग्रेस कमेटी सचिव एवं पाली नगर पंचायत के एल्डरमेन सुरेश गुप्ता, पाली नगर पंचायत अध्यक्ष उमेश चंद्रा, ग्राम पंचायत जेमरा के सरपंच भंवर सिंह व स्थानीय ग्रामीणजन उनके साथ रहे।
रैम्प और सड़क के क्षतिग्रस्त होने के 6 माह बाद भी इसका मरम्मत वन विभाग के परभरोसे रवैये से नहीं हो सका है। स्थानीय वन अधिकारी की ओर से इसके लिए एक कार्ययोजना का प्रस्ताव प्रशासन को जरूर भेजा गया था। लेकिन निष्क्रिय जनप्रतिनिधि के भरोसे रहने से कार्य अब तक स्वीकृत नहीं हुआ। साथ ही वन अधिकारी पुरातत्व विभाग की एनओसी नहीं मिलने की बात भी कर रहे है। किंतु मरम्मत कार्य के लिए पुरातत्व विभाग हस्तक्षेप नहीं करेगा। यदि जिला प्रशासन और वन अधिकारी गंभीरता और सक्रियता दिखाते या जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले जनप्रतिनिधि इसके लिए ठोस पहल और प्रयास करते तो शायद यह कार्य अब तक पूर्ण हो गया होता। लेकिन दुर्भाग्य कि यह काम अबतक नही हो पाया। जिसके कारण रैम्प के हालात व निर्मित विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी माता के भक्त, श्रद्धालु और पर्यटक जान जोखिम में डालकर माता के दर्शन करने पहुंच रहे हैं और अपने मनोकामना की पूर्ति कर रहे हैं।
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